Saturday, October 17, 2009

तो क्या ये नहीं है लाशो की दीवाली....

यूं तो बताने से कोई फ़ायदा नही....फ़िर भी आपको बता दूं तो कोई हर्ज नहीं है तुम चाहो तो सुन लो... नही तो नही....हर बात सुनना कोई फ़र्ज नही....जिये जिसके संग संग.... मरें भी उसी संग....जमाने की ऐसी कोई तर्ज नहीं...साथ है आज जो....वो कल भी रहेगा...ऐसा तो नियम कोई दर्ज नही....यू तो दीपावली सबने मनाई होगी...बड़े धूम-धाम से...त्यौहार ही ऐसा है...चारों तरफ धूम जो मची रहती है...पटाखों की...रंग-बिरंगी फुलझडियों की...जिससे सारा आसमान आज रंग-बिरंगी...चमकदार...अलग-अलग रंगों से जो नहाया रहता है....साथ में मिठाइया भी खाए होगें....घर में रंगोली भी बनाई होगी....अगर यू कहे कि दोस्तो संग खूब मस्ती की तो भला हो भी क्यों न...दिवाली मनाने का दिल....दीवाली यानि दीपों के मेंहदी से सजा घर-आंगन...पटाखों की रौशनी से प्रकाशमान हुआ पूरा आसमान....चारों तरफ खुशियां ही खुशियां....और इस खुशी के ख़ास मौके पर घर का लाड़ला न हो...तो उस ख़शी में कुछ कमी हो जाती है...लेकिन ज़रा सोचिए...और फिर अपने दिल से पुछिएगा....कि अगर किसी घर का इकलौता चिराग इस पावन पर्व पर...उल्लास के पर्व पर....जगमगाते रौशनी में जहां पूरा देश ही दुल्हन की तरह सजा है....वही किसी घर का रौशन इस रौशनी के पर्व पर...घर को रौशन करने के बजाय अधियारी की आगोश में चला गया...वही जहां रायपुर में इस साल दीवाली में लगभग ४ करोड़ के फूटे पटाखों के आवाज की गूंज भी उस रौशन को उस नींद से जगाने में सफल नहीं हो पायेगा....तो आप ही बताईए की उस घर की दीवाली कैसे मनी होगी...शायद इसका अंदाजा आप ख़ुद लगा सकते है...हम आपको बताना चाहेगें की उसकी मृत्यु ऐसी बेवजह दुर्घटना में हुई जिसको सुन कर आप भी आहत हो जायेंगे... दंग भी रह जायेंगे...उस रौशन की जान अपनी प्यारी....मुहबोली बहन को बचाने में गई...जो उसके धुले हुए कपड़ो को सुखाने के लिए छत पर बधे रेंगनी (तार या रस्सी की डोरी ) जिस पर कपड़े डालने के लिए गई थी...और होना क्या था...तार में करंट थी और उसे अपने तपेट में ले लिया...जैसे ही उसका भाई उसको बताने के लिए गया वो भी उसकी चपेट में आ गया और दोनों की मृत्यु उस घटना स्थल पर ही हो गई....वक्त का यही फरमान जो था...उसे और उसके भाई को यमराज जी के हाथो सौपने का...उन्हें सौपने का जिम्मा जो ले लिया था...रौशनी के इस प्रकाश पर्व पर...
तो क्या ये नहीं है लाशो की दीवाली....

Wednesday, October 14, 2009

मेरा दर्द

यूं तो बताने से कोई फ़ायदा नही ,फ़िर भी बता दूं तो कोई हर्ज नही!
तुम चाहो तो सुन लो, नही तो नही,हर बात सुनना कोई फ़र्ज नही!
साथ हो मेरे तुम, ये यकीन ही बहुत है,साथ साबित करो, कोई गर्ज नही!
जिये जिसके संग संग, मरें भी उसी संग,जमाने की ऐसी कोई तर्ज नही!!
साथ है आज जो, वो कल भी रहेगा,ऐसा तो नियम कोई दर्ज नही!
ये दर्द मेरा साथ जायेगा मेरे!किसी दवा से कम हो ये वो मर्ज नही!

Thursday, April 16, 2009

अपने चेहरे को दे नेचुरल लुक

नारी ईष्वर की नायाब रचना हैं, और खूबसूरती ही उसकी पहचान है। अपनी खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए सजना-सॅवरना नारी के स्वभाव का एक हिस्सा है। अर्थात् सांैदर्य हीं उसका मुख्य आकर्षण है।वैसे तो संसार की हर नारी स्वभाविक रुप से सुन्दर होती है। किंतु किसी के चेहरे में कुछ कमी भी हों सकती है। इस प्रकार की कमियों को पहचान कर मेक-अप के द्वारा आसानी से छुपाया जा सकता है। तथा साथ हीं अपने चेहरे को और खूबसूरत बनाया जा सकता है। मेक-अप किसी भी नारी की खूबसूरती में चार चाॅद लगा सकता है। यह बदसूरत को खूबसूरत और खूबसूरत को बदसूरत बना सकता है। इसलिए मेक-अप यानि सौदंर्य प्रसाधनोें का उपयोग करने से पहले यह आवष्यक है कि उनके विषय में पूर्ण जानकारी तथा उनके उपयोग का सही तरीका मालूम हों।ऽ मेक-अप तभी अच्छा लगता है, जब वह आप पर लिपा-पुता लगने के बजाय आपको एक नेचुरल लुक दें।ऽ कई बार ऐसा होता है कि आप बडी मेहनत और घंटों समय लगाकर मेक- अप करते है और आपका सारा मेक- अप पसीने में बह जाता है तो ऐसे में आपको मैटप्रुफ मेक- अप करना चाहिए।ऽ अगर आपको पसीना ज्यादा आता हों तो उससे बचने के लिए मेक- अप करते समय चेहरे पर फाउंडेषन कम और फेस पावडर अधिक लगाना चाहिए।ऽ बार- बार फेस पावडर का टचअप दें, इससे आपका चेहरा दिनभर ताजगी भरा दिखई देगा।मेक- अप की बारिकियाॅ जो आपको नेचुरल लुक दे सकती हैः-ऽ महिलाएं मेक-अप करते समय कभी-कभी ज्यादा खूबसूरती के लिए फाउंडेषन, फेष पावडर आदि अपने चेहरे पर बार-बार लगाती है जिससे चेहरे पर मेक-अप की एक मोटी परत नजर आती है जिससे आपका मेक-अप नेचुरल नहीं लगता है। यदि आप मेक-अप करने से पहले अपनी त्वचा पर प्राइमर का उपयोग करते है तथा फिर मेक-अप का उपयोग करते है तो आपका मेक-अप नेचुरल दिखेगा/ लगेगा।ऽ कई बार महिलाए जल्दी- जल्दी में मेक-अप करते समय अपनी आखों की तरफ कम ध्यान देती है। यानि आॅख के नीचे के काले घेरे अलग हीं नजर आते है जिससे आपका मेक-अप किसी काम का नहीं रहता है। इसको छुपाने के लिए उस स्थान पर नेचुरल लाइट आइल फ्रीकंसीलर लगाए। इससे आपके आॅख के नीचे के काले घेरे छुप जाएगें।ऽ लिपस्टिक भी आपके मेक-अप को परफेक्ट लुक देती है। इसलिए मेक-अप करते समय होंठो पर लिपस्टिक लगाना न भूलें। यदि आपके होंठ मोटे हों तो गहरे रंग की लिपस्टिक लगाएं।ऽ कई बार महिलाए मेक-अप तो कर लेती हंै लेकिन उसको सही तरीके से अपने गर्दन के रंग अनुसार मिला नहीं पाती जिससे उसका एक अलग हीं रंग नजर आता है। इस कमी को दूर करने के लिए मेक-अप करते समय मेक-अप स्पंज को गीला कर उस पर एक- दो बूंद फ्री लिक्विड फाउडेषन की डालकर उसे पूरे चेहरे और गर्दन तक सहीं तरिके से घुमाएं। इससे आपका फाउंडेषन और चेहरे का रंग एक सा लगेगा।

Wednesday, April 8, 2009

ये ज़िन्दगी

खुशी की आँखो से देखा तो पानी के बुलबुले सी नज़र आई ज़िन्दगी.........
बिखरे सपनो की याद आई तो एक पहाड़ सी नज़र आई ज़िन्दगी.............
कभी बिखरा सपना तो कभी एक नई उम्मीद नज़र आई ज़िन्दगी..............
हर सुबह की किरण के साथ आई ज़िन्दगी..................कभी हार तो कभी जीत नज़र आई ज़िन्दगी ..............ये ज़िन्दगी

Saturday, March 28, 2009

क्या लिखूँ..........??

कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ..

कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखूँ या सापनो की सौगात लिखूँ..
मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ..

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ..
वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ..

सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ..
मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ..

वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ..
सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं आंखों की बरसात लिखूँ..

कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
या दिल का सारा प्यार लिखूँ..

— दिव्य प्रकाश..

Wednesday, November 12, 2008

जल प्रदूषण

जल प्रदूषण जल भी पर्यावरण का अभिन्न अंग है। मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। मानव स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ जल का होना नितांत आवश्यक है। जल की अनुपस्थित में मानव कुछ दिन ही जिन्दा रह पाता है क्योंकि मानव शरीर का एक बड़ा हिस्सा जल होता है। अतः स्वच्छ जल के अभाव में किसी प्राणी के जीवन की क्या, किसी सभ्यता की कल्पना, नहीं की जा सकती है। यह सब आज मानव को मालूम होते हुए भी जल को बिना सोचे-विचारे हमारे जल-स्रोतों में ऐसे पदार्थ मिला रहा है जिसके मिलने से जल प्रदूषित हो रहा है। जल हमें नदी, तालाब, कुएँ, झील आदि से प्राप्त हो रहा है। जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण आदि ने हमारे जल स्रोतों को प्रदूषित किया है जिसका ज्वलंत प्रमाण है कि हमारी पवित्र पावन गंगा नदी जिसका जल कई वर्षों तक रखने पर भी स्वच्छ व निर्मल रहता था लेकिन आज यही पावन नदी गंगा क्या कई नदियाँ व जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। यदि हमें मानव सभ्यता को जल प्रदूषण के खतरों से बचाना है तो इस प्राकृतिक संसाधन को प्रदूषित होने से रोकना नितांत आवश्यक है वर्ना जल प्रदूषण से होने वाले खतरे मानव सभ्यता के लिए खतरा बन जायेंगे। जल प्रदूषण के कारण :-

1। औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप आज कारखानों की संख्या में वृद्धि हुई है लेकिन इन कारखानों को लगाने से पूर्व इनके अवशिष्ट पदार्थों को नदियों, नहरों, तालाबों आदि किसी अन्य स्रोतों में बहा दिया जाता है जिससे जल में रहने, वाले जीव-जन्तुओं व पौधों पर तो बुरा प्रभाव पड़ता ही है साथ ही जल पीने योग्य नहीं रहता और प्रदूषित हो जाता है।

2। जनसंख्या वृद्धि से मलमूत्र हटाने की एक गम्भीर समस्या का समाधान नासमझी में यह किया गया कि मल-मूत्र को आज नदियों व नहरों आदि में बहा दिया जाता है, यही मूत्र व मल हमारे जल स्रोतों को दूषित कर रहे हैं।

3। जब जल में परमाणु परीक्षण किये जाते हैं तो जल में इनके नाभिकीय कण मिल जाते हैं और ये जल को दूषित करते हैं।

4। गाँव में लोगों के तालाबों, नहरों में नहाने, कपड़े धोने, पशुओं को नहलाने बर्तन साफ करने आदि से भी ये जल स्रोत दूषित होते हैं।

5। कुछ नगरों में जो कि नदी के किनारे बसे हैं वहाँ पर व्यक्ति के मरने के बाद उसका शव पानी में बहा दिया जाता है। इस शव के सड़ने व गलने से पानी में जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि होती है, जल सड़ाँध देता है और जल प्रदूषित होता है।

जल प्रदूषण के प्रभाव:-

1.समुद्रों में होने परमाणु परीक्षण से जल में नाभिकीय कण मिलते हैं जो कि समुद्री जीवों व वनस्पतियों को नष्ट करते हैं और समुद्र के पर्यावरण सन्तुलन को बिगाड़ देते हैं।

2।प्रदूषित जल पीने से मानव में हैजा, पेचिस, क्षय, उदर सम्बन्धी आदि रोग उपन्न होते हैं। दूषित जल के साथ ही फीताकृमि, गोलाकृमि आदि मानव शरीर में पहुँचते हैं जिससे व्यक्ति रोगग्रस्त होता है।

3।जल में कारखानों से मिलने वाले अवशिष्ट पदार्थ, गर्म जल, जल स्रोत को दूषित करने के साथ-साथ वहाँ के वातावरण को भी गर्म करते हैं जिससे वहाँ की वनस्पति व जन्तुओं की संख्या कम होगी और जलीय पर्यावरण असन्तुलित हो जायेगा।

4। स्वच्छ जल जो कि सभी सजीवों को अति आवश्यक मात्रा में चाहिए, इसकी कमी हो जायेगी।

जल प्रदूषण से बचने के उपाय:-

1। कारखानों व औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थों के निष्पादन की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ इन अवशिष्ट पदार्थों को निष्पादन से पूर्व दोषरहित किया जाना चाहिए।

2। नदी या अन्य किसी जल स्रोत में अवशिष्ट बहाना या डालना गैरकानूनी घोषित कर प्रभावी कानून कदम उठाने चाहिए।

3। कार्बनिक पदार्थों के निष्पादन से पूर्व उनका आक्सीकरण कर दिया जाए।

4। पानी में जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए रासायनिक पदार्थ, जैसे ब्लीचिंग पाउडर आदि का प्रयोग करना चाहिए।

5। अन्तर्राष्टीय स्तर पर समुद्रों में किये जा रहे परमाणु परीक्षणों पर रोक लगानी चाहिए।

6 समाज व जन साधारण में जल प्रदूषण के खतरे के प्रति चेतना उत्पन्न करनी चाहिए।