Wednesday, April 8, 2009

ये ज़िन्दगी

खुशी की आँखो से देखा तो पानी के बुलबुले सी नज़र आई ज़िन्दगी.........
बिखरे सपनो की याद आई तो एक पहाड़ सी नज़र आई ज़िन्दगी.............
कभी बिखरा सपना तो कभी एक नई उम्मीद नज़र आई ज़िन्दगी..............
हर सुबह की किरण के साथ आई ज़िन्दगी..................कभी हार तो कभी जीत नज़र आई ज़िन्दगी ..............ये ज़िन्दगी

1 comment:

मोहन वशिष्‍ठ said...

फिर भी बहुत ही खुबसूरत है ये जिंदगी
कभी हंसाती है
कभी रुलाती है
फिर भी गले ही लगाती है जिंदगी


ये वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें तो बहुत ही अच्‍छा होगा 4;5 बार शब्‍द डाले फिर भी गलत बताता है इसे हटा ही दें हमको आसानी रहेगी