Friday, February 22, 2008

चारो ओर देखअंगरेजी का गीटिर-पिटिरसोचला मनवाका इ देश बा अपना,कब मिली भोजपुरीके कद अपना,खुली आखँन सेदेखी ला इ सपना पहिन के सूट-बूटबोलेमें आपन भाषा,जब केहु केशरम न आई,खुली आखँन सेदेखी ला इ सपना जइसे बोल के अंगरेजीफूलला आपन सीना,वइसन कब लोगसिखियन अपने भाषाके संग जीना,खुली आखँन सेदेखी ला इ सपना देखत- देखत सपनाआ गइल निंदिया,जागा तो पायाहाथ में रहल हमरेअंगरेजी का दुनिया ,तब समझ इ आयल भवा,पहिले बदला अपने केतब चला बदले दुनिया,नाहिं त खुली आखँन सेदेखत-देखत रह जाईइ बस एक सपना

No comments: